सच अच्छा !
पर सच के लिये कोई और मरे ,
तो , और अच्छा !!
क्या तुम ईसा हो जो शूली पर चढो ,
सैर करो , खामोश रहो !!
हक़ अच्छा !
पर हक़ के जुनून मे है जहर का प्याला ,
क्या तुम सुकरात हो जो जर पियो ,
सैर करो , खामोश रहो !!
गर्म आंसू और ठंडी आहे
मन मे क्या मौसम है ,
मगर इस बगिया के भेद न खोलो ,
सैर करो , खामोश रहो !!
पर सच के लिये कोई और मरे ,
तो , और अच्छा !!
क्या तुम ईसा हो जो शूली पर चढो ,
सैर करो , खामोश रहो !!
हक़ अच्छा !
पर हक़ के जुनून मे है जहर का प्याला ,
क्या तुम सुकरात हो जो जर पियो ,
सैर करो , खामोश रहो !!
गर्म आंसू और ठंडी आहे
मन मे क्या मौसम है ,
मगर इस बगिया के भेद न खोलो ,
सैर करो , खामोश रहो !!
(by an unknown poet)